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"नक्सलवाद" सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती

1968 में पश्चिम बंगाल के "नक्सलबाड़ी" गाँव से शुरू हुआ नक्सलियों का आन्दोलन आज इतने व्यापक स्तर पर भारत में अपने पैर पसार चुका है कि भारत के बिहार राज्य के 23 जिले झारखण्ड के 21 उत्तर प्रदेश के 3 महाराष्ट्र के 6 एवं छत्तीसगढ़ के 20 जिले इसकी चपेट में आ चुके हैं। सरकार को इनके बढ़ते हुए ग्राफ पर विशेष रूप से ध्यान देना होगा।
सुकमा में हुए हमले में 26 जवानो को खोने के बाद केवल कड़ी निंदा करके सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया। इस प्रकार की प्रतिक्रिया ये साफ दर्शाती है कि अभी भी बीजेपी की जीत का खुमार नही उतरा है। राष्ट्रभक्त और देशभक्त सरकार का दंभ भरने वाली बीजेपी सरकार पर सवाल उठना भी लाजमी है क्यूंकि वर्तमान समय में खुफियां एजेंसी जो कि सरकार के अधीन आती हैं,उनके इनपुट कैसे नही मिल पाए?

केवल कड़ी निंदा करनी होती तो पिछली सरकार में क्या बुराई थी ये सवाल भी बीजेपी के लिए सिरदर्द बन जायेगा।
सरकार अगर अगले 10 दिन बाद इस हमले का बदला लेकर अपनी पीठ थप थपाएगी, तो विपक्ष का सवाल भी उठना लाजमी है कि ये बदला लेने की नौबत आखिर क्यों आई???

खैर केवल इतना कहना चाहूँगा
कि "नही चाहिए तुम्हारी ये बैठकें और कड़ी निंदा
लौटा दो हमारे जवान सही सलामत और जिन्दा"

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