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ऊर्जा संरक्षण पर विशेष “घटते संसाधनों पर हावी बढ़ती आवश्यकताएं”

    भारत एक तेजी से पैर पसारता हुआ देश है, जहाँ की आधिकाधिक आबादी युवा है और युवा आबादी से सीधा सा मतलब अपनी हर जरूरत के लिए ईंधन, पर्यावरण को ताक पर रखना है. जहाँ पूरा विश्व विकास के लिए नए आयामों को रचने के लिए प्रतिबद्ध है वहां भारत भी इसी दिशा में अग्रसर है. समय के साथ स्वयं के लिए सुख के सभी साधन मनुष्य ने एकत्रित कर लिए है. तेजी से भागते समय के साथ खुद का सामंजस्य बैठाने के लिए मनुष्य ने अपनी अभिलाषाओं में भी वृधि कर ली है. तेजी से बढ़ते कारखाने, गाड़ियाँ, कार इनकी ही देन हैं पर मनुष्य को यह समझना होगा कि प्रकृति में हर वस्तु का सीमित स्थान है एवं प्रकृति के द्वारा प्रदान किये गये सभी संसाधन सीमित है.     ऊर्जा संरक्षण भारत में एक प्रमुख मुद्दा है, किसी भी कार्य को अन्य तरीके से कर उस क्षेत्र की ऊर्जा बचाई जा सकती है पर मनुष्य द्वारा समय के साथ खुद को भगाने की होड़ ने ऊर्जा संरक्षण के मुद्दे को सबसे पीछे की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है. ऊर्जा संरक्षण के उपायों के लिए राज्य की सरकारों को ये सोचना होगा कि सडको पर तेजी से बढ़ते प्राइवेट वाहनों के स्...