@.....काठगोदाम से चले अभी आधा घंटा ही हुआ था, ठंडी हवाएं चेहरे पर थपेड़े मारने लगी थी, पर इन हवाओं से बाइक चलाने में पीड़ा नहीं बल्कि मजा आ रहा था। कभी घर के फ्रिज में फ्रिजर को एक दम से खोलिएगा, वो जो ठंडक निकलती है न एक दम से चेहरे पर पड़ती है, ठीक वैसी ही। हम अपने शहर को याद करने लगे, सीवर लाइन के काम के चलते खुदा पड़ा शहर, हर मोड़ पर लगने वाली हवा से उड़ती धूल चेहरे पर लगती है तो हम जैसे एलर्जी से पीड़ित आदमी का बाइक से मोह भंग होता है। खैर आधे एक घंटे बाद भुवाली में नाश्ता करने के बाद जैसे ही स्कूटी कैंची धाम के रास्ते की ओर बढ़ाई, चार पहिया गाड़ियों की लाइन स्वयं बता रही थी, आस्था और विश्वास क्या होता है। मंदिर के अंदर जाकर अच्छे से दर्शन कर फिर आगे बढ़े, आगे गरम पानी नामक स्थान से दो रास्ते निकलते है, एक अल्मोड़ा दूसरा रानीखेत। हमे जाना था कौसानी जहां दोनो ही रास्तों से पहुंचा जा सकता था, लेकिन अल्मोड़ा वाला रास्ता देखा हुआ था, लिहाजा रानीखेत वाले रास्ते से आगे बढ़े। रास्तों पर सफाई, चिड़ियों की चहचहाहट आप इस रास्ते पर गाड़ी के इंजन ऑन होने के बाद भी सुन...