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कुमाऊं यात्रा पार्ट 2

@.....काठगोदाम से चले अभी आधा घंटा ही हुआ था, ठंडी हवाएं चेहरे पर थपेड़े मारने लगी थी, पर इन हवाओं से बाइक चलाने में पीड़ा नहीं बल्कि मजा आ रहा था। कभी घर के फ्रिज में फ्रिजर को एक दम से खोलिएगा, वो जो ठंडक निकलती है न एक दम से चेहरे पर पड़ती है, ठीक वैसी ही। 
हम अपने शहर को याद करने लगे, सीवर लाइन के काम के चलते खुदा पड़ा शहर, हर मोड़ पर लगने वाली हवा से उड़ती धूल चेहरे पर लगती है तो हम जैसे एलर्जी से पीड़ित आदमी का बाइक से मोह भंग













होता है। 
खैर आधे एक घंटे बाद भुवाली में नाश्ता करने के बाद जैसे ही स्कूटी कैंची धाम के रास्ते की ओर बढ़ाई, चार पहिया गाड़ियों की लाइन स्वयं बता रही थी, आस्था और विश्वास क्या होता है। मंदिर के अंदर जाकर अच्छे से दर्शन कर फिर आगे बढ़े, आगे गरम पानी नामक स्थान से दो रास्ते निकलते है, एक अल्मोड़ा दूसरा रानीखेत। 
हमे जाना था कौसानी जहां दोनो ही रास्तों से पहुंचा जा सकता था, लेकिन अल्मोड़ा वाला रास्ता देखा हुआ था, लिहाजा रानीखेत वाले रास्ते से आगे बढ़े। 
रास्तों पर सफाई, चिड़ियों की चहचहाहट आप इस रास्ते पर गाड़ी के इंजन ऑन होने के बाद भी सुन सकते है। आर्मी एरिया होने के कारण भी कुछ ज्यादा ही शांति थी। बढ़ते बढ़ते कौसानी से पहले सोमेश्वर कस्बे में पहुंचे, ये कस्बा घाटी में स्थित है, पर है बहुत खूबसूरत। कस्बे के पीछे बहती नदी, ऊपर पहाड़, और रोड के बराबर में होती सीढ़ियोंदार खेती, कौसानी पहुंचते पहुंचते शाम के 6 बज चुके थे, ऊंचाई पर होने के कारण ठंडक बढ़ चुकी थी, इतनी की अब वूलेन कपड़े की जरूरत महसूस होने लगी थी। कौसानी शांत था, अल्मोड़ा और नैनीताल के मुकाबले। 
यह स्थान शांति के लिए ही प्रसिद्ध है, किसी से कोई मुकाबला नहीं, कोई बराबरी नहीं। 
अगर आप दस पांच दिन बजट में रहकर प्राकृतिक खूबसूरती को सिर्फ एंजॉय करने आते है तो कौसानी सबसे अच्छा स्थान है। ऐसी जगह कम से कम लोग हो तभी बेहतर है, और हमे तो ऐसी जगह ही घूमने की आदत है।
होम स्टे में कमरा लेने के बाद आज की तकरीबन 165 किलोमीटर की यात्रा का विराम हो चला था, नींद आंखों में थी, और हमारी आंखों में कल के लिए कई किस्से.....

क्रमशः......

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