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कुमाऊं यात्रा पार्ट 2

@.....काठगोदाम से चले अभी आधा घंटा ही हुआ था, ठंडी हवाएं चेहरे पर थपेड़े मारने लगी थी, पर इन हवाओं से बाइक चलाने में पीड़ा नहीं बल्कि मजा आ रहा था। कभी घर के फ्रिज में फ्रिजर को एक दम से खोलिएगा, वो जो ठंडक निकलती है न एक दम से चेहरे पर पड़ती है, ठीक वैसी ही।  हम अपने शहर को याद करने लगे, सीवर लाइन के काम के चलते खुदा पड़ा शहर, हर मोड़ पर लगने वाली हवा से उड़ती धूल चेहरे पर लगती है तो हम जैसे एलर्जी से पीड़ित आदमी का बाइक से मोह भंग होता है।  खैर आधे एक घंटे बाद भुवाली में नाश्ता करने के बाद जैसे ही स्कूटी कैंची धाम के रास्ते की ओर बढ़ाई, चार पहिया गाड़ियों की लाइन स्वयं बता रही थी, आस्था और विश्वास क्या होता है। मंदिर के अंदर जाकर अच्छे से दर्शन कर फिर आगे बढ़े, आगे गरम पानी नामक स्थान से दो रास्ते निकलते है, एक अल्मोड़ा दूसरा रानीखेत।  हमे जाना था कौसानी जहां दोनो ही रास्तों से पहुंचा जा सकता था, लेकिन अल्मोड़ा वाला रास्ता देखा हुआ था, लिहाजा रानीखेत वाले रास्ते से आगे बढ़े।  रास्तों पर सफाई, चिड़ियों की चहचहाहट आप इस रास्ते पर गाड़ी के इंजन ऑन होने के बाद भी सुन...
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कुमाऊं यात्रा पार्ट 1

पिछले चार पांच महीने से ऑफिस में एक ही रूटीन वर्क से परेशान हो चला था मन, लिहाजा सोच तो रखा था कि अब निकलने का समय आ गया है, लेकिन दिल्ली अभी दूर थी।  मेरे लिए शहर से बाहर घूमने के लिहाज से सबसे पहली प्राथमिकता सुकून और शांति होती है, जो लखनऊ, दिल्ली, मुंबई में तो संभव नही। रही बात पहाड़ों की तो उनसे तो शायद पिछले जन्म का नाता है कोई।  यदि आप शहर के प्रदूषणयुक्त, वाहनों के शोर, शहरों की जाम से कुछ ही दिन के लिए भी निजात पाना चाहते है तो करीब के कुमाऊं के पहाड़ आपके लिए मुफीद स्थान है।  दो दिन चली चर्चाओं पर अंतोगत्वा दिनांक 12 को ब्रेक लगा जब पता चला तत्काल में भी टिकट नहीं मिले, फिर भी जाने की कसक ऐसी कि चलो जनरल में ही चलते है, सोचकर 13.04.23 को 9 बजे तक काम निपटाकर सीधे घर, दो जोड़ी कपड़े पैक करके लेट गए, रात में 2.30 बजे उठकर 4 बजे की ट्रेन पकड़कर चल दिए गंतव्य कुमाऊं की ओर। प्रातः काल जब अंधेरा छंट रहा था, रुद्रपुर के आगे का कोई हिस्सा था, ठंडी हवाएं गेट से अंदर आकर एहसास दिलाने को आतुर थी कि गर्म कपड़ों के स्थान पर केवल शर्ट पहनकर आना तुम्हारी भूल है। यहां 16 डिग्री...

आज से करिए सैर, पर्यटकों के लिए खुला दुधवा नेशनल पार्क

                 उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध और एकमात्र इकलौते नेशनल पार्क दुधवा नेशनल पार्क आज 15 नवंबर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। दुधवा नेशनल पार्क अपने आप में एक बेहद खूबसूरत राष्ट्रीय उद्यान है, इसे उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड राज्य के अलग होने के ठीक बाद घोषित किया गया था।  दुधवा नेशनल पार्क का मुख्य द्वार उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी में स्थित यह नेशनल पार्क एक सींग वाले गैंडे एवं बाघों के लिए प्रसिद्ध है। भारत और नेपाल की सीमा पर स्थित इस नेशनल पार्क की सीमा 818 वर्ग किलोमीटर में फैली है, इस नेशनल पार्क के जानवर अक्सर नेपाल के प्रसिद्ध एवं बॉर्डर से लगे राष्ट्रीय पार्क चितवन नेशनल पार्क तथा शुक्ला फांटा नेशनल पार्क तक विचरण करते हुए देखे जाते है। दुधवा में अनेकों प्रकार के वन्यजीव यथा बाघ, हाथी, गैंडे, लोमड़ी, जंगली भालू, मगरमच्छ, घड़ियाल, जंगली सुअर निवास करते है।  दुधवा का प्रसिद्ध गैंडा दुधवा नेशनल पार्क की सीमा से ही लगे हुए पीलीभीत जिले के पीलीभीत टाइगर रिजर्व तथा बहराइच जनपद के कतरनिया घाट एवं लखीमपुर के ही किश...

तृतीय केदार श्री तुंगनाथ महादेव यात्रा तीसरा दिन (थर्ड पार्ट)

 तृतीय केदार श्री तुंगनाथ महादेव यात्रा  दिनांक 11/11/2020 आज की सुबह काफी देर से हुई थी, उसका कारण कल की थकान थी, तकरीबन 7 बजे उठकर फ्रेश होने के बाद चाय पी, चाय पीने के बाद नहाने के लिए गर्म पानी मांगा तो 50 रुपए प्रति बाल्टी के हिसाब से गर्म पानी उपलब्ध हुआ, नहा धोकर जब कमरे से बाहर निकले तो एक बार फिर से फोटो ग्राफी सेशन शुरू हुआ, सुबह सुबह पहाड़ों के एक तरफ पड़ती हुई धूप और पीछे की ओर के पहाड़ वाकई मे मनमोहक लग रहे थे।  अभी चोपता काफी शांत था, शांत से आशय इस बात से है कि अभी टूरिस्ट ने आना शुरू नहीं किया था अन्य जगहों से। दरअसल ऊखीमठ और रुद्रप्रयाग में रात बिताने वाले व्यक्तियों को कम से कम डेढ़ से दो घंटे चोपता तक लगने ही थे, यहां पर्यटकों की आवाजाही का पीक समय 10.30 से 3 बजे तक का होता है।  फोटोसेशन होने के बाद गाड़ी में बैठकर मक्कू मठ की ओर प्रस्थान किया जो यहां से लगभग 16 किलोमीटर था, जबकि स्थानीय लोगो के मुताबिक 9-10 किलोमीटर के आसपास।  लगभग 45-50 मिनट के बाद हम मक्कुमठ में थे, ये गांव घाटी में तलहटी में बसा हुआ है और समृद्ध गांव है, श्री तुंगनाथ महादे...

तृतीय केदार श्री तुंगनाथ महादेव यात्रा- दूसरा दिन (पार्ट सेकेंड)

तृतीय केदार श्री तुंगनाथ महादेव यात्रा (दूसरा दिन) दिनांक 10/11/2020 सुबह 4.00 बजे अलार्म बजा, रोज की आदत के अनुसार उसे 10 मिनट के लिए टैप किया, बढ़ाते बढ़ाते 4.30 तक ले गया, उम्मीद कर रहा था मैं कि शायद मेरे ना उठने पर और कोई बन्दा उठेगा और जरूरत समझते हुए जल्द निकलने के लिए बाकी सबको जगाएगा। पर मैं गलत था,  मेरे अलावा किसी और को कहीं भी जाने की जल्दी न थी, सब आराम से अपनी नींद पूरी कर रहे थे। खैर कल रात में होटल वाले ने बताया था कि अटैच बाथरूम में गीजर की सुविधा है, पर अधिकतर होटलों में खासकर पहाड़ी सुदूर जगह पर यह सुविधा कहने के लिए तो हर होटल में उपलब्ध होती है पर सुबह जब आपको जरूरत होती है तब इस गीजर में कोई न कोई दिक्कत जरूर आती है, फिर आप अपने नहाने का प्रोग्राम या तो कैंसिल करते है या होटल वाले बन्दे को ढूंढते घूमते है, लिहाजा आपका अच्छा खासा वक्त खराब होता है लेकिन हमारे मसले में ऐसा नहीं हुआ, गीजर काम कर रहा था। मैं सबसे पहले उठकर फ्रेश होकर नहाया, उसके बाद बाकी लोगो का नम्बर लगा। आधे से पौन घंटे बाद सभी लोग निकलने के लिए तैयार थे। बाहर निकलकर चाबी रिशेपशन काउंटर पर रख दी...