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जून, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चमचो के सहारे टिकी 'राजनीति"

चमचो के सहारे टिकी “राजनीति” भारत में चमचो का इस्तेमाल आम तौर पर रसोईघर में ही होता रहा है| सारे बर्तन होने के बाद भी चमचे का स्थान सबसे अलग है.सभी तरीके का खाना बनाने के बाद उस खाने में स्वाद लाने के लिए विशेष रूप से चमचे का इस्तेमाल ही किया जाता है, ठीक उसी प्रकार भारत में वर्तमान समय की राजनीति में नेताओं के “चमचो” का विशेष महत्त्व है. चमचो से अभिप्राय उस प्राणी से है जो आपको नेता जी से मिलने का समय से लेकर, जुगाड़ तुगाड़ लगाकर आपके न होने वाले कार्यो को भी नेता जी द्वारा करवाए जाने वाले व्यक्ति से है. आज चमचो का राजनीति में अपना एक विशेष स्थान है. सत्ता में आने के बाद अपने अपने चमचो की तादात दिखने का चलन भी तेजी से बढ़ा है| इस प्रकार का चाव जो नेताओं में बढ़ा है वो उन्हें विलासी बना रहा है. जिस नेता का कोई चमचा नही होगा वो स्वयं किसी न किसी का चमचा होगा और जो खुद बड़ा नेता होगा उसके घर के बाहर तो चमचो की फ़ौज कड़ी हर वक़्त मिलेगी, जो दिन रात बस नेता जी की हाँ में हाँ और रामधुनी में लगी रहती है| ऐसे ही चमचो के कारण नेता भोपूं और निखट्टू भी होते जा रहे है तथा अपनि कैसेट इन्ही चमचो के सहा...

“राजनीतिक जाल में फंसता किसान”

           अभी हाल ही के दिनों में एक मुद्दा पूरे देश में जोर शोर से उठकर सामने आया, नाम था “किसान आन्दोलन”| सभी राजनीतिक पार्टियों ने किसानो के साथ छल किया है, ये तो जायज है पर अपनी राजनीति चमकाने के लिए विपक्ष और विपक्षी पार्टियाँ किसानो को मोहरा बना लेंगी, ये किसी ने सोचा भी न होगा|           राजनीतिक दल द्वारा साम, काम, दंड, भेद सभी तरीके अपनाकर वोटो पर कब्ज़ा करना केवल वर्तमान की राजनीति रह गयी है| बस लालच किसी भी प्रकार का हो सकता है, चाहे वो शराब का हो या पूर्ण कर्ज माफ़ी का| परिणामस्वरुप पार्टियाँ और उनके प्रत्याशी नीतियों की बजाय सुविधाए की बातें ज्यादा करते नजर आते है| पहले चुनाव में लोक लुभावन वादे केवल दक्षिण तक ही सीमित थे परन्तु अब ये पूरे देश में फ़ैल चुके हैं| किसानो का एक बड़ा तबका भारत में है और इन्हें आसानी से अपने पाले में करना लगभग सभी पार्टियाँ अच्छे से जान चुकी है| दरअसल पूरे लोकतंत्र को सभी तरीको के लोकलुभावन नीतियों या कार्यक्रमों का एक जामा फना दिया जा चुका है| बीते म...

"डिजिटल इंडिया के सूरज पर लगता साइबर क्राइम का ग्रहण"

“डिजिटल इंडिया के सूरज पर लगता साइबर क्राइम का ग्रहण” भारत में 2014 में   बीजेपी की सरकार बहुमत से बनने   के बाद सर्वाधिक जोर डिजिटल इंडिया पर दिया जा रहा है. जोकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में है. वर्तमान समय में प्रधानमंत्री के द्वारा नवम्बर में नोट बंदी के बाद से कैशलेस लेनदेन का प्रयोग करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है. जिस हेतु कई प्रकार की योजनायें भी चलाई जा रही है. पर डिजिटल इंडिया की राह में साइबर क्राइम एक रोड़ा बनकर उभरा है. भारत सहित विश्व के अनेक देश साइबर क्राइम से आज बुरी तरह पीड़ित है. अपराध का यह ऐसा आयाम है की महत्वपूर्ण जानकारी, सूचनाओं, तकनीको कारोबारी दावपेचों पर गुपचुप तरीको से चोट करके सालों साल की कड़ी मेहनत और गुप्त जानकारियों को चट कर जाता है. इस अपराध का स्वरुप इतना छद्म है कि बहुत बारीक़ नजर ही इसे पकड़ सकती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक 69 प्रतिशत लोगों में से 2 तिहाई से ज्यादा साइबर क्राइम के शिकार होते हैं. यानि की हर सेकेण्ड 14 लोग इसके पाश मे जकडते जा रहे है. इस अपराध की खास बात ये है कि इसमें अपराध करने वाले का को...