सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

"डिजिटल इंडिया के सूरज पर लगता साइबर क्राइम का ग्रहण"


“डिजिटल इंडिया के सूरज पर लगता साइबर क्राइम का ग्रहण”

भारत में 2014 में  बीजेपी की सरकार बहुमत से बनने  के बाद सर्वाधिक जोर डिजिटल इंडिया पर दिया जा रहा है. जोकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में है. वर्तमान समय में प्रधानमंत्री के द्वारा नवम्बर में नोट बंदी के बाद से कैशलेस लेनदेन का प्रयोग करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है. जिस हेतु कई प्रकार की योजनायें भी चलाई जा रही है. पर डिजिटल इंडिया की राह में साइबर क्राइम एक रोड़ा बनकर उभरा है. भारत सहित विश्व के अनेक देश साइबर क्राइम से आज बुरी तरह पीड़ित है. अपराध का यह ऐसा आयाम है की महत्वपूर्ण जानकारी, सूचनाओं, तकनीको कारोबारी दावपेचों पर गुपचुप तरीको से चोट करके सालों साल की कड़ी मेहनत और गुप्त जानकारियों को चट कर जाता है. इस अपराध का स्वरुप इतना छद्म है कि बहुत बारीक़ नजर ही इसे पकड़ सकती है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक 69 प्रतिशत लोगों में से 2 तिहाई से ज्यादा साइबर क्राइम के शिकार होते हैं. यानि की हर सेकेण्ड 14 लोग इसके पाश मे जकडते जा रहे है. इस अपराध की खास बात ये है कि इसमें अपराध करने वाले का कोई चेहरा भी न नही दिखता, वह सात समंदर पार से भी इस तरीके की हरकतें कर सकता है.
पूरी दुनिया में अभी हाल ही में रेंसमवेयर नाम का वायरस सॉफ्टवेयर सामने आया था जिसने कई देशों के महत्वपूर्ण विभागों के कंप्यूटरो को हैक कर उनका निजी डाटा अपने कब्जे में ले लिया था. भारत में इसके कई जगह मामले सामने आये थे. इसके प्रकोप का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की पूरी दुनिया को आईटी इंजिनियर देने वाला देश भी इसके प्रकोप से नही बच पाया था. इन सबसे इतर भारत के ग्रामीण इलाको में आये दिन अशिक्षित लोगो को फ़ोन पर उनका एटीएम पासवर्ड पुचकार रुपए निकालना आम बात है. ये भी एक साइबर क्राइम ही है. हालाँकि ग्रामीणों के द्वारा इन मामलो की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई जाती है पर 99 प्रतिशत अपराधों में पुलिस किसी भी अपराधी को ढूंड नही सकी. इसका सीधा सा अर्थ है की अभी सरकार को अपनी तकनीकें और विकसित करनी होंगी ताकि किसी भी प्रकार के साइबर अपराध में फंसकर कोई ग्रामीण अपनी गाढ़ी कमाई उडवा न सके. जब साइबर अपराध के दो तीन अपराधो में पुलिस  प्रशासन द्वारा सख्ती से कार्यवाही कर अपराधी को सामने लाया जायेगा तभी लोगों का साहस खासकर ग्रामीण इलाको के लोगो का विश्वाश इन तकनीको पर बढ़ पायेगा. क्यूंकि डिजिटल इंडिया केवल महानगरो द्वारा नही बनता, ग्रामीण क्षेत्रों के उपयोग के बिना डिजिटल इंडिया का सपना अभी कोसो दूर है.
भारत के नव निर्माण का सपना सच तभी होगा जब पुरे देश के लोग इस तकनीक से जुड़ पाएंगे. “डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत सरकार ई क्रांति की बात करती है पर जिस देश में  अभी भी अन्न, जल चुनौती है, जहाँ हर दिन लाखों लोगों का चूल्हा आज भी बड़ी मुश्किल से जलता हो वहां डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता की गारंटी देना एक सपना ही लगता है.”


 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तृतीय केदार श्री तुंगनाथ महादेव यात्रा (पार्ट वन)

 (नोट- इस यात्रा वृत्तान्त में जैसा तीन दिन में मैंने यात्रा की है, जैसा अनुभव आंखो देखा किया है, वही आपके सामने हूबहू लाने की कोशिश करूंगा ) श्री तुंगनाथ महादेव पंच केदारो में तृतीय स्थान पर है, तुंगनाथ महादेव का मंदिर उत्तराखंड के जनपद रुद्रप्रयाग में चोपता नामक स्थान के पास है। चोपता नामक स्थान से तीन किलोमीटर की चढ़ाई के बाद तुंगनाथ मंदिर स्थित है। मान्यता यह है कि यह मंदिर विश्व में सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित है।  तो आते है मुद्दे पर, मैं जनपद शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश का निवासी हूं और एक सरकारी विभाग में संविदा पर कार्यरत हूं, दरअसल पिछले दो सालों से लगातार यू ट्यूब पर विडियोज देखने के बाद  हमारा भी मन हो रहा था बाबा के दर्शन के लिए, पर प्रोग्राम बार बार किसी न किसी कारण टल रहा था, वो कहावत है ना कि जब बाबा बुलाते है तो आदमी भागा भागा जाता है, यही हुआ हमारे साथ।  दो दिन पहले अचानक हमारे घुमक्कड़ दोस्त ने कॉल करके तुंगनाथ जाने के प्लान के बारे में बताया, कुछ देर सोचने के बाद इस शर्त के साथ हामी भरी कि कल संडे को ऑफिस की जरूरी मीटिंग के बाद प्रस्ताव रखेंगे छुट्टी का, ...

सुकून चाहिए तो किशनपुर आइए।

किशनपुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी जिले में स्थित दुधवा नेशनल पार्क का अभिन्न अंग है। दुधवा नेशनल पार्क खीरी जनपद के पलिया कस्बे में स्थित है जबकि किशनपुर के लिए आपको भीरा कस्बे से 6 किलोमीटर दूर कटैया गांव तक जाना पड़ेगा, जहां आप जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर जंगल की सफारी पर निकल सकते हैं। हालांकि जंगल के अंदर किशनपुर और दुधवा नेशनल पार्क जुड़ा हुआ है लेकिन जंगल के अंदर के रास्ते पर जाने की इजाजत केवल वन विभाग के कर्मियों को ही है, अगर आपको दुधवा से किशनपुर या किशनपुर से दुधवा जाना है तो आपको राष्ट्रीय राजमार्ग का ही सहारा लेना पड़ेगा। दरअसल ऑफिस के है एक सहकर्मी पिछले लगभग 15 वर्षों से किशनपुर सेंचुरी जा रहे है, उन्हीं के परामर्श और साथ चलने की रजामंदी के बाद दिनांक 14 मार्च की सुबह किशनपुर के लिए चलना तय हुआ, इस ट्रिप में मेरे अलावा कुल पांच लोग और साथी बने। जंगली ने हमेशा से ही मुझे मोहित किया है फिर चाहे उसका कारण वहां की हरियाली हो या प्रदूषण रहित स्वच्छ वातावरण या फिर शहर कि चकाचौंध और दौड़भाग भरी जिंदगी से दूर शांति का एक वातावरण। तय तारीख 14 को सुब...

भण्डारो का लगा भंडार

एक ही दिन बीस जगह भंडारे या कोई अन्य सेवा करने से बेहतर है की बीस दिन एक ही जगह पर भंडारा या अन्य सेवा की जाये। ताकि किसी गरीब के लिए रोटी का जुगाड़ करना आसान हो जायेगा। और यकीन मानिये बाकि के बचे उन्नीस दिन आप  पुण्य के ज्यादा भागीदार बनेंगे "मुकाबले आज के" खैर .... जैसी जिसकी सोच।