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मार्च, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पुराने घपलों की अब शायद खुलेंगी परतें !

        उत्तर प्रदेश में पुष्टाहार विभाग में हुए घपले का वास्तविक रूप ये है कि ये योजनाये (आगनबाडी मिड डे मील) जिनको मिलनी चाहिए वो इनसे मीलो दूर है, और पंजीरी, दूध का वितरण केवल अधिकारीयों के घर के लिए है। सरकार को भी ये समझना होगा कि जिसे पढना होगा वो वाकई में पढ़ लेगा, अगर इन योजनाओ के बहकावे में आकर कोई बच्चा पढ़ेगा तो ये खाली एक सपना है। इन योजनाओ में प्रयुक्त होंने वाला बजट की अगर आधी भी धनराशि उन्ही बच्चो की पढ़ाई के लिये जरूरी बुनियादी सुविधाओ में लगाई जाती तो आज तस्वीर कुछ और होती। पर अफ़सोस उन्हें खाना बाटना है,दूध बाँटना है, फल बाँटने है, रोज रोज नई नई नौटंकियो के नाम पर रैली निकालनी है। और इतना सब होने के बाद भी सोचो बच्चे यहाँ पढ़ पाएंगे। क्या यार

क्या गीता प्रेस के भी अच्छे दिन आएंगे ?????.......

पिछले कुछ वर्षो से बजट का अभाव, सरकार द्वारा मदद के नाम पर सिर्फ आश्वाशन के कारण अपनी बदहाली पर रो रही गोरखपुर की "गीता प्रेस" के अच्छे दिन अब शायद योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से करीब आते नजर आ रहे हैं।  गीता प्रेस ने हिंदुत्व और हिन्दू धर्म का प्रचार, प्रसार करने का जो जिम्मा बरसो पहले उठाया था वो आज तक कायम है। गीता प्रेस ही एक मात्र ऐसी संस्था है जो कि पूरे देश में अपने लाखों संस्करणों को हिंदुत्व के प्रचार, प्रसार हेतु बेचती है वो भी "उस संस्करण पर व्यय हुई धनराशि से भी कम दाम पर"। या दूसरे शब्दों में कहें तो ये धनराशि आज के जमाने में एक नाम मात्र की है।  ऐसी संस्था जो कि लगभग हर घर में हर दिन उपयोग में जरुर आती है, उस संस्था को वर्तमान में गोरखपुर या प्रदेश के बड़े बड़े उद्योगपतियों से मिलने वाले दान पर निर्भर रहना पद रहा है। "इस काल में गीता प्रेस की यह दशा वाकई पीड़ा देती है जब वर्तमान काल  में संघ प्रमुख 800 साल बाद पहला हिन्दू शासन करार देते हैं"।  पिछली सरकार में इस पर ध्यान क्यों नही दिया गया ये बात भी काफी ...

क्या एंटी रोमियो से लगेगी मनचलों पर लगाम ?

उत्तर प्रदेश में भाजपा की नवगठित सरकार ने अपने तेवर दिखाने शुरू किये उसी क्रम में एंटी रोम्यो का गठन किया गया. लेकिन किसी भी योजना के शुरू होते ही उस पर अपना विरोध जताने का तरीका शायद विपक्ष में बैठने वाले राम गोपला यादव जी भूल गये. उनके मुताबिक एंटी रोमियो से "नौजवानों" को दिक्कत हो रही है पर ये समझ से परे है कि जिन नौजवानों की दिक्कत की बात राम गोपाल जी कह रहे है उनमे से किसी ने भी पकडे जाने के बाद भी किसी तरह का आरोप पुलिस पर नही लगाया या फिर पुलिस को किसी भी प्रकार की लिखित शिकायत नही की है क्यूंकि शायद वो लड़के हुडदंगी किस्म के ही थे. शायद राम गोपाल जी ने उन लड़कियों के विडियो नही देखे जिसमे उन्होंने कैमरे के सामने ये बात कुबुली है की इस योजना के शुरु होने से उन्हें काफी फायेदा होगा  सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है अच्छी बात है लेकिन एंटी रोमियो की आड़ में अगर किसी प्यार करने वाले बालिगो को सरेराह पीटना या फिर बात करते दो दोस्तों को मारना सरासर गलत है. सरकार को इसके दुसरे पहलू पर भी ध्यान देना होगा की इस योजना का गलत इस्तेमाल न होने पाए. भारत एक लोकतान्त्रिक देश है ...