उत्तर प्रदेश में पुष्टाहार
विभाग में हुए घपले का वास्तविक रूप ये है कि ये योजनाये (आगनबाडी मिड डे
मील) जिनको मिलनी चाहिए वो इनसे मीलो दूर है, और पंजीरी, दूध का वितरण केवल
अधिकारीयों के घर के लिए है।
सरकार को भी ये समझना होगा कि जिसे पढना होगा वो वाकई में पढ़ लेगा, अगर इन योजनाओ के बहकावे में आकर कोई बच्चा पढ़ेगा तो ये खाली एक सपना है।
इन योजनाओ में प्रयुक्त होंने वाला बजट की अगर आधी भी धनराशि उन्ही बच्चो की पढ़ाई के लिये जरूरी बुनियादी सुविधाओ में लगाई जाती तो आज तस्वीर कुछ और होती।
पर अफ़सोस उन्हें खाना बाटना है,दूध बाँटना है, फल बाँटने है, रोज रोज नई नई नौटंकियो के नाम पर रैली निकालनी है। और इतना सब होने के बाद भी सोचो बच्चे यहाँ पढ़ पाएंगे।
क्या यार
सरकार को भी ये समझना होगा कि जिसे पढना होगा वो वाकई में पढ़ लेगा, अगर इन योजनाओ के बहकावे में आकर कोई बच्चा पढ़ेगा तो ये खाली एक सपना है।
इन योजनाओ में प्रयुक्त होंने वाला बजट की अगर आधी भी धनराशि उन्ही बच्चो की पढ़ाई के लिये जरूरी बुनियादी सुविधाओ में लगाई जाती तो आज तस्वीर कुछ और होती।
पर अफ़सोस उन्हें खाना बाटना है,दूध बाँटना है, फल बाँटने है, रोज रोज नई नई नौटंकियो के नाम पर रैली निकालनी है। और इतना सब होने के बाद भी सोचो बच्चे यहाँ पढ़ पाएंगे।
क्या यार
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