16 दिसंबर की उस भयानक रात के कांड पर पहले ट्रायल कोर्ट फिर हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की फांसी की सजा शुरू से लेकर अब तक बरकरार कर भारत में एक नई मिसाल कायम की है। इस मामले ने भारत में दुष्कर्म के प्रति क़ानूनी प्रक्रियाओं और नजरिये को हमेशा के लिए बदल दिया। हालाँकि अभियुक्तों के वकीलों को आपत्ति थी कि सारे आरोपियों को सामूहिक रूप से सजा सुनाई गयी, जबकि अपराध में सबकी अलग अलग भूमिका थी और उनकी सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक पृष्ठभूमि के हिसाब से सजा तय नही हुई है। पर सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी आपत्तियों को ख़ारिज करते हुए कहा कि यह अपराध जघन्यतम श्रेणी का अपराध है, इसमें ढिलाई कतई नही की जा सकती है। इस फैसले से जहाँ पीड़ित परिवार के घर ख़ुशी का माहौल है कि चलो देर से ही सही पर उन्हें न्याय जरुर मिला है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से महिलाओ पर होने वाले अत्याचारों पर भी रोक लगेगी। पर भारत में अभी भी हजारो निर्भयाये न्याय की आस में बैठी है, कि देर से ही सही पर उनको एक न एक दिन न्याय जरुर मिलेगा। निर्भया कांड के फैसले के बाद इन निर्भयाओ को भी बल मिलेगा। म...