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“लोक लुभावन वादों का दौर”

       लोकसभा चुनाव का प्रथम चरण संपन्न हो चुका है, प्रथम चरण के लिए विभिन्न पार्टियों द्वारा विभिन्न राज्यों में नियुक्त किये गये स्टार प्रचारक अब दूसरे राज्यों की ओर रुख कर चुके हैं ताकि जनता को फिर एक बार बहलाया और उलझाया जा सके, ऐसे वादों के झांसे में, जो शायद कभी समय पर पूर्ण नही हो पाएंगे.        चुनाव चालों और दिमागी कसरत का युद्ध है, यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे जिसके हाथ में बंदूक होती है, जीत उसी की होती है, ठीक उसी प्रकार चुनाव में प्रत्याशी की जीत उसके प्रचार और प्रचार के दौरान किये जाने वाले बड़े बड़े वादों से होती है. वर्तमान परिवेश के राजनीतिज्ञ यह भलीभांति समझ चुके है कि वह जनता के हर वर्ग को कभी संतुष्ट नही कर सकते हैं, इसीलिए जनता के बहुसंख्यक वर्ग की समस्याओ पर अपना ध्यान आकर्षित करते हैं, बड़े बड़े वादे कर वह उस वर्ग को अपने पक्ष में करने की जुगत में रहते है जो आसानी से उनके झूठे वादों पर विश्वास कर लें.         देश के राजनीतिक दलों में चुनावी वादे करते समय मुफ्त परियोजनाओ...