बीते लगभग एक पखवाड़े से देश के अलग अलग हिस्सों से चोटी कटने की अफवाहों ने जो जोर पकड़ा, वो अभी भी बदस्तूर जारी है. चोटी कटना, उसके बाद महिलाओं को बिल्ली जैसी आकृति दिखना, इन दो चीजों की समानताएं लगभग हर घटना में पाई गयी. चोटी कटना भी एक प्रकार का अंधविश्वास है. अन्धविश्वास ने उभरते भारत के सूरज के एक हिस्से (खासकर ग्रामीण तबके ) को अपनी जद में ले रखा है. जीवन के हर पग पर विज्ञानं और तकनीक के वर्चस्व की कहानी बिखरी पड़ी है पर फिर भी कुछ लोग दकियानूसी सोच का परचम बुलंद करना चाहते हैं. अंधविश्वास का अधिकाधिक प्रमाण केवल ग्रामीण क्षेत्रों में मिलता है चूँकि अंधविश्वास फ़ैलाने वाले, जिनकी दुकाने इन्ही के सहारे टिकी हैं, ये लोग कम पढ़े लिखे लोगों को अपने जाल में फंसाकर रुपया ऐंठते हैं. अभी कुछ साल पहले गर्मियों में खबर फैली कि भगवान की मूर्तियाँ दूध पी रही है, शाम का वक़्त था, खबर सुनते ही मंदिरों में लाइने लग गयी. इन लाइनों में पढ़े लिखे लोग भी थे. इस बात से इनकार नही किया जा सकता है कि वर्तमान सम...