भारत के लगभग सभी प्रदेश बाढ़ नामक शब्द से भलीभांति परिचित है. हालाँकि इसे सीधे तौर पर बाढ़ कहना गलत ही होगा , आसमान से तो केवल पानी की बूंदें बरसती है पर यहाँ धरती पर सरकार की नाकामी, बदइन्तजामी उसे बाढ़ का रूप दे देती है. बाढ़ से देश के सभी राज्य लगभग परिचित और पीड़ित हैं. हर साल बाढ़ आने के बाबजूद इससे होने वाली मौतों और जनहानि में लगातार इजाफा ही हुआ है. यही चीज़ यहाँ सरकारों के ऊपर प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है कि आखिर समस्या की जानकारी होने के बाबजूद उसके निराकरण का पूर्ण प्रयास नही किया गया. आजकल देश का एक हिस्सा असम बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित है. सरकार की तरफ से अपने कार्यालय में एसी में बैठकर मीडिया और चैनलों को बाईट में यह कहना कि “सरकार हर तरीके के कार्य में प्रतिबद्ध है एवं बाढ़ से ग्रसित लोगों की शिविरों में नियमित रूप से देखभाल हो रही है” नामक बड़े बड़े बयान देना तो आसान है, पर हकीक़त इससे कोसों दूर है. असम के स्थानीय लोगो के मुताबिक व्यक्तियों एवं मवेशियों को एक ही स्थान पर और एक ही समय खाना उपलब्ध कराया जाना सरकार की हीलाहवाली को दर्शाता है. देश...