पाकिस्तान
बनने की राह पर “कश्मीर”
भारत का मुकुट कहे जाने वाला कश्मीर की
दशा से वर्तमान में लगभग सभी परिचित हैं| पिछले तीन वर्षो से लगातार यहाँ आतंकी
घटनाओं में इजाफा ही हुआ है| कश्मीर की कमाई का एक बड़ा हिस्सा यहाँ आने वाले
पर्यटकों से होता है अर्थात पर्यटन यहाँ के लोगो के लिए कमाई का एक अच्छा साधन है,
पर पिछले कुछ वर्षों से लगातार कश्मीर सुलग रहा है, जल रहा है| और ये सब राजनीती खोने
के डर की वजह से न लिए जाने वाले एक्शन की भी एक बड़ी वजह है| आतंकियों ने जिस
तरीके से भारतीय सेनाओं को निशाना बनाकर ये घटनाएँ की है, उनसे साफ जाहिर है कि ये
भारत की राष्ट्रभक्ति का ढोंग पीटने वाली सरकार को ठेंगा दिखाना है|
जम्मू कश्मीर में अमरनाथ यात्रा पर हमला
वो भी सावन के पहले पवित्र सोमवार को| यह साफ साफ एक साजिश के तहत एक धर्म विशेष
को निशाना बनाकर किया गया| हर साल आयोजित होने वाली ये यात्रा हमेशा से ही सुरक्षा
एजेंसियों के लिए सिरदर्द बनकर सामने आती हैं| इस यात्रा में हमला उन व्यवस्था से
अलग चलने वालो के लिए एक सबक भी है क्यूंकि प्रारंभिक ख़बरों में अधिकारीयों की तरफ
से जिस तरह से यह बात की गयी कि बस नियमो के विरूद्ध प्रतिबंधित समय में चल रही
थी, वहीँ बस मालिक का कहना है कि टायर पंक्चर होने की वजह से वह काफिले से अलग हो
गये थे| यह अमरनाथ यात्रा सदैव ही केंद्र और राज्य सरकार के लिए चुनौती एवं चिंता
का विषय रही है| यात्रियों पर हुए हमले पर निश्चित तौर से हर मुद्दे पर राजनीती
करने वालों के लिए एक दुसरे पर आरोप लगाने का सही समय है| ये समय राष्ट्रभक्ति,
देशभक्ति का दंभ भरने वाली बीजेपी की सरकार के लिए शर्मनाक है क्यूंकि केंद्र में
सरकार आपकी, सेना आपके अधीन और गठबंधन की राज्य में सरकार भी आपकी, इन सबके बाबजूद
केवल कड़ी निंदा मात्र से देश कैसे चुप बैठेगा ?
केवल कड़ी निंदा ही करनी थी तो पिछली
सरकार में क्या बुराई थी| बीजेपी को अब समझना होगा कि केवल एक मात्र सुर्जिकल
स्ट्राइक के नाम पर सरकार अपनी पीठ कब तक ठोकती रहेगी| राज्य में महबूबा मुफ़्ती की
सरकार किसी भी आतंकी घटना को रोकने में विफल रही है| पुरे देश की संवेदनाएं पीडितो
के साथ है| पुरे देश का एक ही नारा है कि अब विकास नही “विनाश” चाहिए ऐसी सोच वालो
का और उन्हें भटके हुए नौजवान कहकर उनका बचाव करने वाले लोगो का| हालाँकि जिन
लोगों ने इस यात्रा में भाग लिया है वे भलीभांति जानते है कि यात्रा मार्ग कितना
दुर्गम है तो ऐसे किसी भी माहौल में सरकार से पूर्ण सुरक्षा की गारंटी लेना बेमानी
है पर सुरक्षा एजेंसी के लगातार अलर्ट के बाबजूद इतनी बड़ी घटना संदेह पैदा करती
है|
इस तरीके की घटनाओ को अंजाम देनें वालों
को उस वक़्त बल और मिल जाता है जब भारत का मानवाधिकार आयोग सेना द्वारा कुछ दिन
पहले पत्थरबाज को जीप पर बांधने पर उसे पीड़ित बताकर 10 लाख का मुआवजा दे जाता है|
56 इंच के सीने की दुहाई देने वाली सरकार आखिर सोच किस नजरिये से रही है ये आम
आदमी की सोच से परे है| इस तरीके के मुआवजे बाँटने से कहीं न कहीं सेना का मनोबल
गिरता है और आतंकियों को बल मिलता है| इजराइल से दुनिया शायद इसीलिए खौफ खाती है
कि वहां पर रहने वाले 90 लाख लोग केवल और केवल देशभक्त है जबकि भारत में उसके कई
गुना जयचंद| अब समय आ गया है कि कश्मीर में फेल हो चुकी सरकार को निरस्त करके
राष्ट्रपति शासन लगाया जाये, या फिर सेना को इतनी छूट दी जाये कि उसे हर गोली का
हिसाब देनें के लिए इजाजत मांगने हेतु दिल्ली की तरफ टकटकी लगाये देखना न पड़े| जब
तक सत्ता के लिए सेना को बैसाखी के रूप में उपयोग कर लेने की प्रवत्ति से छुटकारा
नही पाया जायेगा तब तक इस तरीके की घटनाओ पर शायद ही लगाम लगे| आतंकवाद देश पर
अंग्रेजों की तरह राज करने लगा है जिससे हमे फिर से आजाद होने की जरूरत है, पर
लगता ऐसा है कि आतंकवाद हमेशा अपने जड़ों को गहराई से फैलता रहेगा क्यूंकि अपने अनैतिक
उद्देश्यों की पूर्ति और प्राप्ति के लिए देश के कुछ लोग अभी भी इसको समर्थन दे
रहे हैं|
अपूर्व बाजपेयी
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