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“वन्यजीवो से बढ़ते टकराव का दोषी खुद मनुष्य है”

  पिछले दो सालो में उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र पीलीभीत, मैलानी जिलो में करीब दो दर्जन से ज्यादा लोग बाघ का शिकार हो चुके है, इन सभी घटनाओ में अधिकतर घटनाओ में वही व्यक्ति बाघ या जंगली जानवर का शिकार हुआ जो बाघ अभ्यारण, टाइगर रिजर्व में प्रतिबंध होने के बाबजूद अंदर गया. 22 से अधिक मौतें, वो भी एक के बाद एक, इन सभी घटनाओ के बाद गाँववालों (खासकर बाघ या अन्य जंगली जानवर का शिकार हुए व्यक्ति के परिजनों) का पुलिस प्रसाशन पर गुस्सा करना, तोड़फोड़ करना लाज़मी है, स्थानीय नेताओं ने भी ऐसे वक्त में अपनी राजनीती चमकाने में कोई कसर नही छोड़ी लेकिन किसी ने भी सरकार का ध्यान इस ओर दिलाने की नही सोची कि बाघों या अन्य जंगली जानवरों द्वारा आबादी के पास या अंदर आकर व्यक्तियों का शिकार करने का प्रमुख कारण क्या है ? दरअसल पशुओ से हमारे रिश्ते एक जैसे कभी नही रहे, एक प्रजाति के तौर पर हमने अपने लालच को सामने रखकर ये तय कर लिया कि किसे घर में रखना है और किसका संहार करना है, कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य यह है कि जिस जानवर से कोई प्रत्यक्ष लाभ नही हुआ उसे “खत्म” करने की नीति बनी और जो लाभकारी साबित हुआ उ...

बेरोजगारों का दर्द समझे सरकार

 उत्तर प्रदेश में पिछले डेढ़ साल में जिस तरह से हर भर्ती पेपर लीक या कोर्ट के चक्कर में लंबित पड़ी है, उससे साफ़ है कि सरकार में बैठे अधिकारी इन भर्तियो को लेकर संवेदनशील नही है. देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण उत्तर प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या भी सबसे ज्यादा है, हर साल लाखो की संख्या में इंटर, ग्रेजुएशन पास करने वाले बच्चे जब किसी सरकारी नौकरी की लिखित परीक्षा देकर वापस अपने घर तक नही पहुँच पाते तब तक परीक्षा सम्बन्धी वेबसाइट पर पेपर लीक/परीक्षा स्थगित होने की जानकारी अपलोड कर दी जाती है.   विधानसभा चुनाव् के दौरान उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीती तलाशते योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों द्वारा की जा रही कम भर्तियो पर जब सवाल खड़े किये और दावे भी किये, कि सरकार बनते ही बंपर भर्तियाँ की जायेंगी, तो युवाओ के एक बड़े तबके ने भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया पर उन बेरोजगारों की चिंता को बढ़ाने में भी सरकार ने पूरा सहयोग किया फिर चाहे वह दरोगा भर्ती का कोर्ट में चला जाना हो, पुलिस भर्ती का रद्द होना हो या फिर नलकूप आपरेटर की परीक्...

“केरल की तबाही से कुछ सीखेंगे हम”

दक्षिण भारत का एक खूबसूरत राज्य केरल इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. पिछले दिनों आयी भीषण बाढ़ से केरल लगभग तबाह हो चुका है. जिन्दगी को पटरी पर दोबारा लाने के प्रयास सरकारों द्वारा शुरू किये जा चुके है, इसी क्रम में केंद्र सरकार द्वारा छः सौ करोड़ रुपए जारी भी किये गये है. हालाँकि यह राशि अत्यंत कम है क्योंकि केरल के राज्यपाल ने लगभग दो हजार करोड़ की अनुमानित नुकसान का अंदाजा जताया है.        केरल में इस साल तीस मई से मानसूनी बारिश ने जो कहर ढाना शुरू किया, उसका असर वर्तमान समय तक आते आते बाढ़ ने ले लिया. यहाँ यह कहना गलत न होगा कि “आसमान से तो केवल पानी की बूंदे बरसती है लेकिन धरती पर सरकार की नाकामी उसे बाढ़ का रूप देती है. करीब सौ वर्षो की सबसे बड़ी बाढ़ की मार झेल रहे केरल में बचाव का काम लगभग पूरा हो चुका है. अब बाकी है तो केवल लोगो के घरो में खालीपन, उनकी आँखों में बसा तबाही का वो मंजर. केरल में बाढ़ से तबाही का कारण केवल बारिश ही नही है बल्कि पर्यावरणविदो के मुताबिक बारिश के अलावा तबाही का अन्य कारण अवैध निर्माण भी है जो कि इन जगहों पर सरकार की नाक के नीच...

सरकार का चौपाया बनने की कगार पर लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ

एबीपी न्यूज़ चैनल में पिछले 24 घंटों के दौरान जो कुछ भी हुआ है , वो चौंकाने वाला बिल्कुल भी नही है. ये एक ना एक दिन होना ही था.  जब आप सरकार की नाकामियों कॊ जनता के सामने लाने लगे, सरकार द्वारा दिये जा रहे बड़े बड़े भोजों का तिरस्कार करने लगे, और सबसे बड़ी बात जब आपके सहयोगी (गोदी मीडिया) आपके ऊपर हुई इस कार्यवाही पर चुप्पिया साधे बैठ जाये, फिर जब इस तरीके की बाते (जबरन इस्तीफा)  सामने आती है तो आपको कोई हैरानी नही होनी चाहिये.. अभिसार शर्मा, मिलिंद, पुण्य प्रसून बाजपेयी इन तीन पर आज जो गाज गिरी है उसकी गूँज आपको भविष्य में ज़रूर सुनने कॊ मिलेगी. समय एक सा नही रहता. कई लोग कह रहे है कि अब रवीश की बारी है, मैं कहता हूँ अब उन सब कलमकारों की बारी है जो इस मुद्दे पर अपनी ज़बान बंद कर बैठे हैं. लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ का वर्तमान में क्या हाल है, किसी से छिपा नही है. ये चौथा स्तम्भ सरकार का चौपाया बनने की कगार पर है. हालाँकि आप में से काफ़ी लोगो की वैचारिक राय होने के कारण वो मन ही मन इस फैसले पर खुश भी हो रहे होगे, पर क्या आपने सोचा है कि इस समय जो हो रहा है वो भविष्य की सरक...

“लोकतंत्र को शर्मसार कर रहा भीड़तंत्र”

       हमारा देश भारत भीड़तंत्र के द्वारा किये गये कारनामो को पहले भी कई बार देख चुका है जिनके कारण भारत की पूरी दुनिया में किरकिरी हुई है. चाहे वह 84 के दंगे रहे हो या फिर दादरी, अलवर जैसे नये मुद्दे. सालो से शांत इस भीड़तंत्र का पिछले डेढ़ दो सालो से ज्यादा उत्तेजित होकर उत्पात इस स्तर तक मचाना कि उसमे किसी व्यक्ति की जान चली जाए. ये कहीं न कहीं समाज, सरकार दोनों को सचेत करने के लिए काफी है कि भीड़ के बहाने या भीड़ में छिपकर किसी से अपनी निजी दुश्मनी निकालना कितना आसान है.         भारत भले ही दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता हो पर राष्ट्र के तौर पर काफी युवा है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक एवं विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है. भारत में लोकतंत्र को एक मशीन की तरह आसानी से चलना चाहिए लेकिन कुछ हानिकारक तत्व इस काम में बाधा डालते है, इसका नतीजा ये होता है कि भारत के संवैधानिक लक्ष्य और लोकतांत्रिक आकांक्षायें पूरी नही हो पाती. पिछले दो वर्षो में भीड़ द्वारा बिना सबूत और गवाह के केवल अफवाहों पर विश्वास करके जिस तरीक...

ऊर्जा संरक्षण पर विशेष “घटते संसाधनों पर हावी बढ़ती आवश्यकताएं”

    भारत एक तेजी से पैर पसारता हुआ देश है, जहाँ की आधिकाधिक आबादी युवा है और युवा आबादी से सीधा सा मतलब अपनी हर जरूरत के लिए ईंधन, पर्यावरण को ताक पर रखना है. जहाँ पूरा विश्व विकास के लिए नए आयामों को रचने के लिए प्रतिबद्ध है वहां भारत भी इसी दिशा में अग्रसर है. समय के साथ स्वयं के लिए सुख के सभी साधन मनुष्य ने एकत्रित कर लिए है. तेजी से भागते समय के साथ खुद का सामंजस्य बैठाने के लिए मनुष्य ने अपनी अभिलाषाओं में भी वृधि कर ली है. तेजी से बढ़ते कारखाने, गाड़ियाँ, कार इनकी ही देन हैं पर मनुष्य को यह समझना होगा कि प्रकृति में हर वस्तु का सीमित स्थान है एवं प्रकृति के द्वारा प्रदान किये गये सभी संसाधन सीमित है.     ऊर्जा संरक्षण भारत में एक प्रमुख मुद्दा है, किसी भी कार्य को अन्य तरीके से कर उस क्षेत्र की ऊर्जा बचाई जा सकती है पर मनुष्य द्वारा समय के साथ खुद को भगाने की होड़ ने ऊर्जा संरक्षण के मुद्दे को सबसे पीछे की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है. ऊर्जा संरक्षण के उपायों के लिए राज्य की सरकारों को ये सोचना होगा कि सडको पर तेजी से बढ़ते प्राइवेट वाहनों के स्...