सरकार की कुछ नीतियाँ मेरे समझ से
परे हैं इनमे से एक योजना मिड डे मील भी है| जोकि परिषदीय विद्यालयों में बच्चो को
दोपहर का भोजन देने की है| मेरे समझ से बाहर है कि सरकार ये क्यों नही समझती कि
क्यूँ प्राइवेट स्कूल के बच्चे, सरकारी स्कूलों से आगे और अच्छे हैं| जाहिर है एक
बात का सीधा सा जबाब वहां की शिक्षा
व्यवस्था एवं गुड़वत्ता से है| तो क्यूँ आज हम ऐसे दौर में जी रहे है जहाँ बच्चो को
पढाई के लिए प्रेरित करने हेतु मिड डे मील
बाँटने का सहारा लिया जा रहा है| हम पढाई का स्तर निरंतर नीचे गिराते जा रहे है
परन्तु मिड डे मील में रोज इजाफा करते जा रहे हैं, यहाँ तक की पिछली सरकार तो थाली चम्मच भी बाँटने से नही हिचकी| आने वाले दिनों
में इससे इनकार भी नही किया जा सकता कि जिस प्रकार से रोज मिड डे मील के साधनों
में बढ़ोत्तरी हो रही है तो उस प्रकार से कल को स्कूलों में सब्जियां और फल भी बंटने लगेंगे| तो तब
इनको विद्यालय नही बल्कि राशन पानी की दुकान कहना उचित होगा|
हम
सरकार के ऊपर आरोप नही मढ़ रहे बल्कि ये बताने की कोशिश कर रहे है की जितना बजट
और पैसा इस योजना में खर्च होता है उसका यदि आधा पैसा भी शिक्षको के लिये सेमीनार,
उच्च तकनीकी साधनों के साथ पढाई जैसी व्यवस्थाओ में लगाया जाये तो ज्यादा बेहतर
होगा| आज मिड डे मील के नाम पर कई सौ विद्यालयों के शिक्षको के घरों में
मासिक राशन का एकत्रीकरण हो रहा है| सरकार को ये भी समझना चाहिए की जनगणना, मतगणना,
रोज होने वाली रैलियों के नाम पर शिक्षको की ड्यूटी एक शोषण के समान ही है| शिक्षक
का काम केवल पढाना ही रखना होगा तभी शिक्षा का स्तर सुधर सकता है “बढ़ फिर भी नही
सकता”| बढ़ाने के लिए अभी सिस्टम में काफी परिवर्तन की आवश्यकता है|
जैसी
आज भी सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर हेतु बिजली कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएँ
पूर्ण नही है| आज जब देश का प्रधान सेवक भारत को डिजिटल बनाने का सपना देख रहा है
तो सरकारों को भी ये सोचना होगा कि बिना बुनियादी एवं तकनीकी ज्ञान के हम कैसा
डिजिटल इंडिया बना पाएंगे और
इस बात पर भी मंथन करना होगा कि देश के विद्यालयों को बिजली, इन्टरनेट व् अन्य
जरूरी सुविधाओं से लैस कर ही डिजिटल इंडिया को साकार कर पाएंगे|
आज
भारत में एक शिक्षक के ऊपर जितने दायित्व सौपे गये है शायद दूसरे किसी पर नही| सरकार को मेरा एक सुझाव
भी है कि जनगणना, मतगणना, रैलियों, मिड डे मील, दूध व् फल बाँटना इन सभी कामो को
अगर बेरोजगार युवको द्वारा कराया जाये और शिक्षक को शिक्षा के लिए ही रखा जाये तो
निश्चित ही शिक्षा में निल होता ग्राफ एक नई उचाईयों की ओर बढ़ेगा|
अपूर्व
बाजपेयी
सुन्दर व् सटीक चिंतन।
जवाब देंहटाएंअच्छा आलेख
Thnk u ......
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