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अब और घुटन सहन नही जवानो को

भारत के सामने आज एक सिपाही का दर्द सामने आया। मेरी नजर में तो सलाम है उन सैनिको को जिनके घर वाले पहले से ऐसी सेवाओ में होने के कारण "उनका इस स्थिति से अवगत होने" के बाद भी देश सेवा में जाने का जज्बा लेकर सीमाओ पर तैनात रहते हैं।अब इंतजार है उस जाँच का जिसका जिक्र सिपाही ने किया भी है।हालाँकि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत सक्रियता दिखाई है, इससे भरोसा रखना चाहिए कि सरकार सिर्फ इस मामले की जाँच नही बल्कि पूरे सिस्टम की पड़ताल करवाएगी।जांच और नियमों के नाम पर तेजबहादुर को प्रताड़ित न किया जाए. इसलिए सरकार यह आश्वस्त करे कि तेजबहादुर के साथ कुछ भी नहीं होने दिया जाएगा. मानसिक प्रताड़ना के कारण सीनियर को गोली मारने, ख़ुदकुशी करने की घटनाएं सामने आती रहती हैं. कम से कम तेजबहादुर ने सरकार, मीडिया और देश से बात करने की कोशिश की है. उनकी इस बेचैनी की आवाज़ को सुनिये. एक जवान का साहस बोल रहा है. अपने लिए नहीं, देश के लिए बोल रहा है।सेना के सभी जवान इस स्थिति से भली भांति परिचित हैं पर नौकरी से हाथ धोने या तबादला नामक डर से वे अभी तक चुप थे। उम्मीद है कि तेजबहादुर के साहस से उन सैनिको के मन में भी सरकार से दो टूक बात कहने की हिम्मत पैदा होगी।

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