भारत के सामने आज एक सिपाही का दर्द सामने आया। मेरी नजर में तो सलाम है उन सैनिको को जिनके घर वाले पहले से ऐसी सेवाओ में होने के कारण "उनका इस स्थिति से अवगत होने" के बाद भी देश सेवा में जाने का जज्बा लेकर सीमाओ पर तैनात रहते हैं।अब इंतजार है उस जाँच का जिसका जिक्र सिपाही ने किया भी है।हालाँकि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत सक्रियता दिखाई है, इससे भरोसा रखना चाहिए कि सरकार सिर्फ इस मामले की जाँच नही बल्कि पूरे सिस्टम की पड़ताल करवाएगी।जांच और नियमों के नाम पर तेजबहादुर को प्रताड़ित न किया जाए. इसलिए सरकार यह आश्वस्त करे कि तेजबहादुर के साथ कुछ भी नहीं होने दिया जाएगा. मानसिक प्रताड़ना के कारण सीनियर को गोली मारने, ख़ुदकुशी करने की घटनाएं सामने आती रहती हैं. कम से कम तेजबहादुर ने सरकार, मीडिया और देश से बात करने की कोशिश की है. उनकी इस बेचैनी की आवाज़ को सुनिये. एक जवान का साहस बोल रहा है. अपने लिए नहीं, देश के लिए बोल रहा है।सेना के सभी जवान इस स्थिति से भली भांति परिचित हैं पर नौकरी से हाथ धोने या तबादला नामक डर से वे अभी तक चुप थे। उम्मीद है कि तेजबहादुर के साहस से उन सैनिको के मन में भी सरकार से दो टूक बात कहने की हिम्मत पैदा होगी।
(नोट- इस यात्रा वृत्तान्त में जैसा तीन दिन में मैंने यात्रा की है, जैसा अनुभव आंखो देखा किया है, वही आपके सामने हूबहू लाने की कोशिश करूंगा ) श्री तुंगनाथ महादेव पंच केदारो में तृतीय स्थान पर है, तुंगनाथ महादेव का मंदिर उत्तराखंड के जनपद रुद्रप्रयाग में चोपता नामक स्थान के पास है। चोपता नामक स्थान से तीन किलोमीटर की चढ़ाई के बाद तुंगनाथ मंदिर स्थित है। मान्यता यह है कि यह मंदिर विश्व में सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित है। तो आते है मुद्दे पर, मैं जनपद शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश का निवासी हूं और एक सरकारी विभाग में संविदा पर कार्यरत हूं, दरअसल पिछले दो सालों से लगातार यू ट्यूब पर विडियोज देखने के बाद हमारा भी मन हो रहा था बाबा के दर्शन के लिए, पर प्रोग्राम बार बार किसी न किसी कारण टल रहा था, वो कहावत है ना कि जब बाबा बुलाते है तो आदमी भागा भागा जाता है, यही हुआ हमारे साथ। दो दिन पहले अचानक हमारे घुमक्कड़ दोस्त ने कॉल करके तुंगनाथ जाने के प्लान के बारे में बताया, कुछ देर सोचने के बाद इस शर्त के साथ हामी भरी कि कल संडे को ऑफिस की जरूरी मीटिंग के बाद प्रस्ताव रखेंगे छुट्टी का, ...
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